Thursday, 27 August 2015

केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अधिकारी संवर्ग संगठन (Central Secretariat Official Language Service Officers’ Cadre Association) की आम सभा (General Body) की दिनांक 17.08.2015 को बैठक


दिनांक 17.08.2015 को  निर्माण भवन में केन्‍द्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अधिकारी संवर्ग संगठन (Central Secretariat Official Language Service Officers’ Cadre Association) की  आम सभा (General Body) की बैठक  


केन्‍द्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अधिकारी संवर्ग संगठन की आम सभा को संबोधित करते हुए महासचिव, श्री राकेश दुबे 

संगठन के अध्‍यक्ष, श्री दिनेश कुमार पाण्‍डेय ( निदेशक, स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय) की अध्‍यक्षता में इसकी आम सभा की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें संगठन के महासचिव, श्री राकेश बी दुबे (उप निदेशक, व्‍यय विभाग, वित्‍त मंत्रालय), उपाध्‍यक्ष, श्री महेश चंद्र भारद्वाज (उप निदेशक, केंद्रीय जल आयोग), संयुक्‍त सचिव, श्री विजय सिंह मीणा (उप निदेशक, विधि कार्य विभाग), कोषाध्‍यक्ष, श्री भारतेश कुमार मिश्र (संयुक्‍त निदेशक, नीति आयोग), कार्यकारिणी के  सदस्‍य, श्री सादर सिंह (उप निदेशक, पंचायती राज मंत्रालय) एवं श्री राकेश कुमार कुलश्रेष्‍ठ (संयुक्‍त निदेशक, रक्षा (उत्‍पादन)) के साथ-साथ बड़ी संख्‍या में अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में अनुवादक एसोसिएशन के अध्‍यक्ष, श्री दिनेश कुमार सिंह, महासचिव, श्री अजय कुमार झा एवं उनके महत्‍वपूर्ण कार्यकारिणी सदस्‍य, श्री राज कुमार रावत और श्री राकेश मलिक आदि को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।

                   एसोसिएशन की आम सभा में संवर्ग के विभिन्‍न मुद्दों पर चर्चा करते हुए प्रतिभागीगण


अध्‍यक्ष महोदय की अनुमति से महासचिव, श्री राकेश बी दुबे ने बैठक की शुरुआत करते हुए इस एसोसिएशन द्वारा अभी तक किए गए प्रयासों का कालानुक्रमिक (chronological) विवरण प्रस्‍तुत किया। उन्‍होंने बताया कि किस प्रकार अक्‍टूबर,2012 में संगठन का विधिवत् चुनाव होने के बाद 01 नवम्‍बर, 2012 से नई कार्यकारिणी ने काम करना शुरू किया और इसके बाद से राजभाषा विभाग के सहयोग से निदेशक, संयुक्‍त निदेशक, उप निदेशक पद पर यथा-स्‍थिति नियमित एवं तदर्थ पदोन्‍नतियां कराने, तदर्थ सहायक निदेशकों के अत्‍यधिक उलझे हुए मामले को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में लगातार पैरवी करके सुलझाने के काम किए और वरिष्‍ठ अनुवादकों की सहायक निदेशक के पद पर तदर्थ पदोन्‍नति कराने के लिए लगातार प्रयास किए।

अलग-अलग मामलों के बारे में संक्षेप में जानकारी दी गई क्‍योंकि बैठक की समय-सीमा को देखते हुए कार्यसूची के अन्‍य बिन्‍दुओं पर भी चर्चा करनी थी। बैठक में निम्‍नलिखित मुद्दों पर चर्चा हुई और निर्णय लिए गए-


          
                                          आम सभा में माननीय सदस्‍यगण चर्चा में भाग लेते हुए

1. संगठन के सदस्‍यों ने कहा कि उन्‍हें संगठन की गतिविधियों के बारे में जानकारी नियमित तौर पर प्राप्‍त नहीं हो पाती है इसलिए यह निर्णय लिया गया कि संगठन के ब्‍लॉग को सक्रिय किया जाए और कार्यकारिणी समिति, आम सभा की बैठकों में लिए गए निर्णयों की सूचना के साथ-साथ अन्‍य गतिविधियों के बारे में भी माननीय सदस्‍यों को अवगत रखा जाए।

2. बैठक की समय-सीमा के कारण मामलों की जानकारी विस्‍तार से नहीं दी जा सकी और मुख्‍य-मुख्‍य बातें ही बताई जा सकीं। संगठन के माननीय सदस्‍यों की यह राय थी कि विभिन्‍न मुद्दों एवं गतिविधियों के बारे में संगठन द्वारा किए गए प्रयासों और इन पर संगठन की सुविचारित नीति  के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए जिससे कि सदस्‍यगण इस बारे में अद्यतन रह सकें।

3.  सातवें केंद्रीय वेतन आयोग के विचारार्थ संगठन द्वारा भेजे गए अभ्‍यावेदन की मुख्‍य-मुख्‍य बातों को भी आम सभा के समक्ष रखा गया। (इस बारे में विस्‍तार से सूचना इसी ब्‍लॉग पर जल्‍दी ही प्रकाशित की जाएगी)।

4. राजभाषा विभाग की ओर से सहायक निदेशक के पद पर सीधी भर्ती कोटे से भरे जाने के लिए 51 अधिकारियों की भर्ती की मांग राजभाषा विभाग को भेज दिए जाने के मुद्दे पर चर्चा हुई। इस बारे में अनुवादक एसोसिएशन की ओर से अध्‍यक्ष श्री दिनेश सिंह जी को अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया गया। उन्‍होंने अन्‍य बातों के साथ-साथ  यह बताया कि अधिकारी संवर्ग संगठन के साथ इस मुद्दे पर उनकी लगातार बैठकें होती रही हैं और संघ लोक सेवा आयोग में भी इस बारे में अभ्‍यावेदन दोनों की ओर से भेजा गया जिसके परिणाम-स्‍वरूप आयोग ने राजभाषा विभाग से जवाब तलब किया। उन्‍होंने आगे बताया कि अन्‍य मुद्दों पर भी वे लगातार अधिकारी संवर्ग संगठन के संपर्क में रहते हैं। संगठन की ओर से उन्‍हें आश्‍वस्‍त किया गया कि इस मुद्दे पर वे हर कदम पर अनुवादक एसोसिएशन के साथ हैं।

                          प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्‍नों का उत्‍तर देते हुए महासचिव, श्री राकेश दुबे


5.  महासचिव ने इस एसोसिएशन द्वारा समानांतर अधिकारी एसोसिएशन के साथ एका करने के संबंध में किए गए प्रयासों का भी संक्षेप में उल्‍लेख किया।  उन्‍होंने  बताया कि समानांतर संघ के साथ एका करने हेतु पिछले दो वर्षों में लगभग पांच बैठकें की जा चुकी हैं लेकिन हर बार ऐन मौके पर उस संगठन के महासचिव पीछे हट जाते रहे। सबसे ताजा  प्रयास जुलाई, 2015  माह में किया गया था, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी ऐन मौके पर उस संगठन के महासचिव पीछे हट गए। यह उल्‍लेखनीय है कि अधिकारी संवर्ग संगठन की ओर से श्री दिलीप कुमार निगम और श्री डी पी मिश्रा तथा समानांतर एसोसिएशन की ओर से उस संगठन के अध्‍यक्ष, श्री डी.एस रावत जी और उपाध्‍यक्ष, श्री सुबोध कुमार जी ने एकीकरण के संबंध में हुई प्रारंभिक बैठकों में हिस्‍सा लिया। इन बैठकों के लिए दोनों एसोसिएशन के महासचिवों की सहमति इन्‍हें प्राप्‍त थी। एक दो बैठकों में समानांतर संगठन के महासचिव एवं अन्‍य पदाधिकारी भी उपस्‍थित रहे। इनके बीच बनी सहमति के आधार पर अधिकारी संवर्ग संगठन की कार्यकारिणी समिति की बैठक योजना आयोग में हुई जिसमें श्री दिलीप कुमार निगम एवं श्री डी पी मिश्रा ने उस समय तक हुई प्रगति की जानकारी दी। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अन्‍य बातों के साथ-साथ निम्‍नलिखित प्रमुख बिन्‍दुओं पर सहमति बनी-  

(क)   कि मान्‍यता संबंधी अपेक्षाओं को पूरा करने तथा अन्‍य तकनीकी कारणों से दोनों ही एसोसिएशन अपने-अपने नाम छोड़कर एक तीसरे नाम जैसे कि -केन्‍द्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अधिकारी एसोसिएशन या ऐसे ही किसी अन्‍य नाम को अपनाने पर सहमत हैं और इसके अनुक्रम में वे राजभाषा विभाग को अपनी-अपनी कार्यकारिणी समिति की ओर से पत्र लिखकर सूचित करेंगे कि दोनों एसोसिएशन के सदस्‍य उस नई एसोसिएशन के सदस्‍य समझे जाएं।
(ख)  कि ऐसी सूचना देने के बाद घोषित किए जाने वाले चुनाव में एक दूसरे की सहमति से पदाधिकारियों को नामांकन के लिए चुना जाएगा। चुनाव होने तक तदर्थ आधार पर महासचिव के पद पर श्री ब्रजभान को और अध्‍यक्ष के पद पर श्री राकेश दुबे को रखा जाएगा। इसी प्रकार से अन्‍य पदाधिकारियों  के नाम भी एक दूसरे को सुझाए गए जिन पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई।

(ग) कि अन्‍य छोटे-मोटे मुद्दों पर चर्चा करने और सहमति के उक्‍त बिन्‍दुओं पर हस्‍ताक्षर करने के लिए दोनों एसोसिएशन की कार्यकारिणी समितियों की साझा बैठक 17 जुलाई, 2015 को प्रशुल्‍क आयोग, खान मार्केट में की जाएगी ताकि औपचारिकताएं पूरी करके सहमति पत्र राजभाषा विभाग को सौंपा जा सके।

लेकिन 15 जुलाई को ही पहले तो साझा बैठक की तिथि 17 से बदलकर 20 जुलाई किए जाने का प्रस्‍ताव समानांतर एसोसिएशन की ओर से किया गया और बाद में 17 जुलाई को वार्ता में उक्‍त एसोसिएशन का प्रतिनिधित्‍व  करने वाले अध्‍यक्ष श्री डी एस रावत जी और उपाध्‍यक्ष श्री सुबोध कुमार जी को उस संगठन के महासचिव द्वारा यह कह दिया गया कि वे अब इस मामले में आगे बढ़ना नहीं चाहते। चूंकि इसके पहले चार बार एकीकरण  के प्रयासों में भी ऐसी ही पलटी मारी गई थी जिससे क्षुब्‍ध होकर एएसआई की बैठक में  उस एसोसिएशन के तत्‍कालीन उपाध्‍यक्ष, श्री एस. के. गौड़ पहले ही इस्‍तीफा दे चुके थे और इस बार भी वही कलाबाजी दिखाई जा रही थी । इससे क्षुब्‍ध होकर श्री डी एस रावत और श्री सुबोध कुमार ने अपने-अपने पदों से इस्‍तीफा दे दिया जो सार्वजनिक हो चुका है। 

श्री राकेश दुबे ने अपनी ओर से और केन्‍द्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा के हित में सार्वजनिक तौर पर यह घोषणा की कि वे एकीकरण के सभी प्रयासों में अंतर्मन से हिस्‍सा लेते रहे हैं लेकिन इन प्रयासों की आड़ में समानांतर एसोसिएशन ने यह झूठा प्रचार करना शुरू कर दिया कि केन्‍द्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अधिकारी संवर्ग संगठन तो समाप्‍त हो गया है। इसलिए आगे से संगठन के किसी भी सदस्‍य को एकीकरण के प्रयास करने के लिए अधिकृत नहीं किया जाएगा।  उन्‍होंने यह अपील की कि सदस्‍यगण किसी प्रकार के दुष्‍प्रचार के झांसे में न आएं और उन्‍हें आश्‍वस्‍त किया कि संगठन पूरी ईमानदारी और शक्‍ति से काम करता रहेगा। उपस्‍थित माननीय सदस्‍यों द्वारा एकमत होकर अपना पुरजोर समर्थन इस संगठन को जारी रखने का दृढ़ संकल्‍प व्‍यक्‍त किया गया। दुष्‍प्रचार को दरकिनार करते हुए और पारदर्शिता की कसौटी पर खरे उतरने की दृष्‍टि से उन्‍होंने यह घोषणा की कि एकीकरण के लिए ऊपर बिन्‍दु संख्‍या 5 (क) और (ख) में उल्‍लिखित बातों पर सहमति का सर्वसम्‍मत पत्र जिस दिन कोई भी अधिकारी लेकर आ जाएगा, उसी दिन इस संगठन की ओर से राजभाषा विभाग को वैसा ही पत्र सौंप दिया जाएगा। लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं देता क्‍योंकि बैठक में मौजूद एक माननीय सदस्‍य ने यह कहा कि 'जन्‍मजात महासचिव' कभी इसके लिए सहमत न होंगे।

अंत में, केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अधिकारी संवर्ग संगठन के अध्‍यक्ष, श्री दिनेश कुमार पाण्‍डेय को धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ ही आम सभा की बैठक संपन्‍न हुई।

Saturday, 14 September 2013

हिंदी दिवस के उपलक्ष्‍य में शुभकामनाएं - राजभाषा हिंदी जनमानस की भाषा बने

मित्रो,

केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अधिकारी संवर्ग संगठन हिंदी दिवस (14 सितंबर, 2013)  के शुभ अवसर पर केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा के सभी अधिकारियों के साथ-साथ अपने सभी अनुवादक साथियों को भी हार्दिक बधाई देता है। आइए,  इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर यह संकल्‍प लें कि हम अपने-अपने कार्यालयों में भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 343 व 351 में अंतर्विष्‍ट प्रावधानों के मद्देनज़र पूरे वर्ष सरल व सुबोध हिंदुस्‍तानी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देंगे। आप सभी इस बात से सहमत होंगे कि ऐसा करने से जहां एक ओर सरकारी काम-काज में हिंदी के क्रमिक प्रयोग को आसानी से प्रोत्‍साहित किया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में हिंदी भाषा अपने सामर्थ्‍य व अपनी देवनागरी लिपि की वैज्ञानिकता के कारण जनमानस की भाषा भी बन सकेगी।

पुनश्‍च हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।

जय हिंद, जय हिंदी।  


Friday, 13 September 2013

नव-पदोन्‍नत निदेशकों को बधाई

केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा संवर्ग अधिकारी संगठन  राजभाषा विभाग द्वारा 08 संयुक्‍त निदेशकों को निदेशक के पद पर पदोन्‍नत किए जाने पर उन्‍हें बधाई देता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस अधिकारी संगठन ने निदेशकों की काफी समय से लंबित पदोन्‍नति को लेकर गृह राज्‍य मंत्री महोदय और राजभाषा विभाग के सचिव महोदय व संयुक्‍त सचिव महोदया के स्‍तर पर मौखिक व लिखित दोनों ही रूप में एक से अधिक बार चिंता व्‍यक्‍त की थी, लेकिन यह भी निर्विवाद रूप से सत्‍य है कि यह सब राजभाषा विभाग द्वारा स्‍व-प्रेरणा से किए गए प्रयासों के कारण ही संभव हो सका है। इसलिए, यह अधिकारी संगठन अपने संवर्ग के आठ निदेशकों की पदोन्‍नति के लिए राजभाषा विभाग के उच्‍चाधिकारियों के साथ-साथ राजभाषा विभाग के सेवा अनुभाग के प्रति विशेष रूप से हार्दिक आभार व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍हें इस नेक कार्य के निपटान के लिए साधुवाद ज्ञापित करता है।

यहां पर इस बात का उल्‍लेख करना संदर्भगत होगा कि राजभाषा विभाग के सचिव महोदय व संयुक्‍त सचिव महोदया दोनों ने इस अधिकारी संगठन को विगत हाल ही में आश्‍वासन दिया है कि निदेशक के पद पर प्रतिनियुक्‍ति के मौजूदा प्रावधान को पूरी तरह से समाप्‍त करने की कार्रवाई राजभाषा विभाग द्वारा शीघ्र ही शुरू की जाएगी। पुनश्‍च नव-पदोन्‍नत निदेशकों को बधाइयां और राजभाषा विभाग को धन्‍यवाद।

Friday, 6 September 2013

कैट में वेतनमान संबंधी लंबित मामले (सुनवाई की अगली तारीख - 20 सितंबर, 2013) के संबंध में सभी अधिकारियों से विनम्र अपील

मित्रो,

जैसा कि आप सभी इस बात से अवगत ही हैं कि वर्ष 1986 में चौथे केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा के कनिष्‍ठ अनुवादक और केंद्रीय सचिवालय सेवा के सहायक के पदों के लिए समान वेतनमान अर्थात 1400 - 2600/ रु. का वेतनमान दिया गया था। लेकिन, सहायकों के एसोसिएशन ने कैट में मुकदमा दायर करके और कैट द्वारा वर्ष 1990 में  उस मुकदमे पर उनके पक्ष में निर्णय दिए जाने के फलस्‍वरूप सहायकों के लिए वर्ष 1986 से प्रभावी 1640 - 2900/ रु. का वेतनमान प्राप्‍त किया जोकि उस समय हमारे संवर्ग के वरिष्‍ठ अनुवादक के वेतनमान के समतुल्‍य था। इस तथ्‍य के मद्देनज़र और विगत में सहायक और कनिष्‍ठ अनुवादक का सदैव बराबर वेतनमान होने के तथ्‍य के भी मद्देनज़र तत्‍कालीन अनुवादक संघ ने  इस विसंगति को दूर कराने के लिए कैट के पश्‍चात माननीय दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय में मुकदमा दायर किया।  माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने अपने निर्णय में कनिष्‍ठ अनुवादक को वर्ष 1986 से सहायकों के समान 1640 - 2900/ रु. का वेतनमान प्रदान किए जाने का आदेश दिया था। लेकिन, सरकार ने उक्‍त निर्णय को आंशिक रूप में लागू करते हुए वर्ष 1996 से नोशनल और वर्ष 2003 से वास्‍तविक रूप में उक्‍त वेतनमान प्रदान किया। इसके फलस्‍वरूप उक्‍त निर्णय को वर्ष 1986 से लागू कराने के लिए कैट में पुन: मुकदमा दायर किया गया है। इस मामले पर अनुकूल निर्णय आने से संवर्ग के अधिकारियों सहित कमोबेश हमारे लगभग सभी साथियों को आर्थिक लाभ पहुंचने की आशा है। 

इस समय, इस मुकदमे की पैरवी 17 जुलाई, 2012 को निर्वाचित केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अनुवादक संघ द्वारा पूरी मुस्‍तैदी के साथ की जा रही है। तत्‍कालीन अनुवादक एसोसिएशन द्वारा इस संबंध में पूर्व में संवर्ग के सभी अनुवादकों व अधिकारियों से चंदा एकत्र करने का कार्य किया गया था। उस समय पर्याप्‍त मात्रा में चंदा एकत्र नहीं हो सका था। यद्यपि उस चंदे में से कुछ राशि गत वर्ष निर्वाचित अनुवादक संघ को सौंप दी गई है, तथापि सौंपी गई राशि उक्‍त मुकदमे में आगे की अपेक्षित कार्रवाई करवाने के लिए अपर्याप्‍त है। अत: संवर्ग के सभी अधिकारियों, जिन्‍होंने उस समय अपना 1000/ रु. का अंशदान नहीं दिया था, से विनम्र अपील है कि इस समय मौजूदा अनुवादक संघ द्वारा एकत्र किए जा रहे चंदे की राशि में 1000/- रु. का अपना अंशदान दें ताकि वे इस मुकदमे की पैरवी के लिए रखे गए वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता की सेवाएं जारी रख पाने में सक्षम हो सकें। 

हमें विश्‍वास है कि उपर्युक्‍त के संबंध में संवर्ग के समस्‍त अधिकारियों का सहयोग व समर्थन निरपवाद रूप से  प्राप्‍त होगा। सधन्‍यवाद।

सेवा संबंधी मामलों पर अद्यतन स्‍थिति

मित्रो,

केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अधिकारी संवर्ग संगठन द्वारा राजभाषा विभाग से संपर्क करने पर ज्ञात हुआ है कि राजभाषा विभाग के पास कार्रवाई हेतु लंबित संवर्ग संबंधी विभिन्‍न मुद्दों पर राजभाषा विभाग द्वारा की गई या की जा रही कार्रवाई की अद्यतन स्‍थिति निम्‍नानुसार है: - 

1).  आठ निदेशकों की पदोन्‍नति संबंधी मामला:  निदेशक के इस समय रिक्‍त कुल 10 पदों में से 08 पदों को तदर्थ आधार पर पदोन्‍नति से भरने हेतु 07 अगस्‍त, 2013 को हुई विभागीय पदोन्‍नति समिति की बैठक के कार्यवृत्‍त को पदोन्‍नति समिति के सभी सदस्‍यों द्वारा अनुमोदित किए जाने के पश्‍चात उसे लगभग एक सप्‍ताह पूर्व माननीय गृह राज्‍य मंत्री जी के अनुमोदनार्थ प्रस्‍तुत किया गया था। इस संबंध में राजभाषा विभाग की सहायता करने के उद्देश्‍य से संगठन के पदाधिकारियों द्वारा उक्‍त मिसिल के संचालन पर बराबर नज़र रखी जा रही थी। आज ही पूर्वाह्न में संगठन के महासचिव ने माननीय मंत्री जी के अनुमोदन के पश्‍चात इस मिसिल को सचिव, राजभाषा विभाग के पास पहुंचा दिया है। आज अपराह्न या कल पूर्वाह्न तक इस मिसिल के सेवा अनुभाग, राजभाषा विभाग के पास पहुंच जाने की संभावता है। तत्‍पश्‍चात, राजभाषा विभाग के सचिव महोदय के अनुमोदन से निदेशकों की तैनाती किए जाने संबंधी आदेश जारी किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।

2).  पांच उप-निदेशकों की संयुक्‍त निदेशक के पद पर पदोन्‍नति: राजभाषा विभाग से यह भी जानकारी प्राप्‍त हुई है कि विभाग द्वारा पांच उप-निदेशकों को संयुक्‍त निदेशक के पद पर तदर्थ आधार पर  पदोन्‍नत किए जाने की कार्रवाई शीघ्र ही शुरू की जा रही है।

3). संशोधित भर्ती नियमों की स्‍थिति: इस संगठन के पदाधिकारियों द्वारा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीऐंडटी) के संबंधित अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने और साथ ही, राजभाषा विभाग की वर्तमान संयुक्‍त सचिव महोदया की डीओपीऐंडटी के संबंधित संयुक्‍त सचिव के साथ बैठक होने के फलस्‍वरूप लगभग 20 दिन पूर्व डीओपीऐंडटी द्वारा अनुमोदित भर्ती नियमों की मिसिल को इस संगठन के महासचिव ने राजभाषा विभाग पहुंचा दिया था।

राजभाषा विभाग में उक्‍त भर्ती नियमों के सभी पहलुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जा रहा है। यदि राजभाषा विभाग को किसी पहलू को लेकर कोई आपत्‍ति होगी, तो उक्‍त भर्ती नियमों को डीओपीऐंडटी के विचारार्थ पुन: भेजना पड़ेगा। यदि राजभाषा विभाग डीओपीऐंडटी द्वारा अनुमोदित भर्ती नियमों को यथावत स्‍वीकार कर लेता है, तो सचिव महोदय के अनुमोदनोपरांत इन भर्ती नियमों को संघ लोक सेवा आयोग तथा केंद्रीय विधि और न्‍याय मंत्रालय के अनुमोदनार्थ भेजने की कार्रवाई की जाएगी।

4). मौजूदा तदर्थ उप-निदेशकों के नियमितीकरण का मुद्दा:  उन चार-पांच तदर्थ उप-निदेशकों को छोड़कर जिनकी राजभाषा विभाग द्वारा बार-बार अनुस्‍मारक दिए जाने के बावजूद विभाग में अभी तक एपीएआर प्राप्‍त नहीं हुई है, शेष सभी तदर्थ उप निदेशकों को नियमित किए जाने संबंधी कार्रवाई को शीघ्र ही संपन्‍न किए जाने की संभावना है। इस संबंध में राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर नज़र बनाए रखें।

इस संगठन द्वारा विगत में किए गए प्रयासों से सभी अधिकारियों को अवगत कराने के प्रयोजन से इस ब्‍लॉग पर चलायी जा रही पूर्व-दृश्‍य (Flashback) नामक कड़ी के साथ-साथ भविष्‍य में आपको सेवा संबंधी मुद्दों पर अद्यतन स्‍थिति से भी अवगत कराने का प्रयास रहेगा। साथ ही, आप सभी साथियों के सुझाव व टिप्‍पणियां प्रार्थित हैं।

Wednesday, 28 August 2013

श्रीकृष्‍णजन्‍माष्‍टमी पर शुभकामनाएं

जन्‍माष्‍टमी के शुभ अवसर पर केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अधिकारी संवर्ग संगठन की ओर से केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा परिवार के सभी सदस्‍यों को हार्दिक शुभकामनाएं।
 
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्‍ण ने अर्जुन को कर्म के बारे में उपदेश देते हुए कहा है:
 
कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोअस्‍त्‍वकर्मणि।।  
 
तात्‍पर्य: तुम्‍हे अपना कर्म (कर्तव्‍य) करने का अधिकार है, किंतु कर्म के फलों के तुम अधिकारी नहीं हो। तुम न तो कभी अपने आपको अपने कर्मों के फलों का कारण मानो, न ही कर्म करने में कभी आसक्‍त होओ।
 
श्रीकृष्‍णजन्‍माष्‍टमी के इस पावन अवसर पर आइए संगठन के हम सभी सदस्‍य यह संकल्‍प लें कि भगवान श्रीकृष्‍ण के उपर्युक्‍त उपदेश में निहित भावना से ओतप्रोत होते हुए अपने संवर्ग के लंबित सभी मुद्दों का शीघ्रातिशीघ्र निदान करने और संवर्ग की बेहतरी के लिए सदैव अग्रसर रहें।

Tuesday, 27 August 2013

पूर्व दृश्‍य (Flashback) - 09 नवंबर व 03 दिसंबर, 2012 को राजभाषा विभाग के तत्‍कालीन सचिव को ज्ञापन

मित्रो,

इस संगठन ने 23 अगस्‍त, 13 को अपने इस ब्‍लॉग का शुभारंभ करते समय आपको आश्‍वासन दिया था कि संगठन द्वारा इस ब्‍लॉग के माध्‍यम से 07 नवंबर, 2012 से लेकर अभी तक संवर्ग के विभिन्‍न मुद्दों को लेकर किए गए प्रयासों की कड़ियों में जानकारी सुलभ कराई जाएगी। साथ ही, आप सुलभ संदर्भ हेतु केंसराभासे अधिकारी संवर्ग संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्‍यों के नाम भी जानने के इच्‍छुक होंगे। 

सर्वप्रथम उल्‍लेखनीय है कि संगठन ने 07 नवंबर, 12 को ही परिवहन भवन के भूतल स्‍थित सभागार में अपनी आम सभा की बैठक बुलाई। इस बैठक में केंसराभासे संवर्ग के सभी स्‍तर के अधिकारियों ने बड़ी संख्‍या में भाग लिया। संगठन के अध्‍यक्ष, श्री दिनेश कुमार पाण्‍डेय जी की अनुमति प्राप्‍त करने के उपरांत बैठक की शुरुआत करते हुए संगठन के महासचिव, श्री राकेश दुबे ने निर्वाचित कार्यकारिणी को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए आम सभा के बैठक में उपस्‍थित सभी सदस्‍यों के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया और साथ ही, इस बैठक में उपस्‍थित होने के लिए उनका धन्‍यवाद भी ज्ञापित किया। तत्‍पश्‍चात उन्‍होंने सभा के समक्ष उन सभी लंबित मुद्दों का उल्‍लेख किया जिन पर संगठन द्वारा कार्रवाई की जानी अपेक्षित है। महासचिव ने निदेशक के पद पर से प्रतिनियुक्‍ति के प्रावधान को हटाने, सितंबर, 2011 में अधिसूचित हुए संवर्ग पुनर्गठन के फलस्‍वरूप नए भर्ती नियमों को शीघ्रातिशीघ्र अधिसूचित कराए जाने और उक्‍त पुनर्गठन के समय रिक्‍त पड़े सभी पदों को एकबारगी रिलैक्‍सेशन के तहत पदोन्‍नति द्वारा भरे जाने, तदर्थ सहायक निदेशकों सहित सभी स्‍तर के अधिकारियों को रिक्‍ति की तारीख से नियमित किए जाने जैसे कई महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर संगठन द्वारा अपनाई जाने वाली कार्यनीति का विस्‍तारपूर्वक ब्‍यौरा दिया।  आम सभा के सभी सदस्‍यों से एक-एक करके इन मुद्दों पर राय  भी मांगी गई। तत्‍पश्‍चात कुछ महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर सर्वसम्‍मति से उनको राजभाषा विभाग के समक्ष उठाए जाने का निर्णय लिया गया। अंत में चर्चा के लिए कोई अन्‍य मुद्दा न होने की स्‍थिति में अध्‍यक्ष महोदय को धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ बैठक संपन्‍न हुर्इ।

तदनंतर, संगठन के अध्‍यक्ष, श्री दिनेश कुमार पाण्‍डेय, दोनों उपाध्‍यक्ष, श्री सुनील कुमार व श्री महेश चन्‍द्र भारद्वाज, महासचिव, श्री राकेश बाबू दुबे, कोषाध्‍यक्ष, श्री भारतेश कुमार मिश्र, दोनों संयुक्‍त सचिव, श्रीमती ऊषा बिंजोला व श्री विजय सिंह मीणा सहित कार्यकारिणी के कुछ सदस्‍यों ने 09 नवंबर व 03 दिसंबर, 2012 को राजभाषा विभाग के तत्‍कालीन सचिव, श्री ए. के. मंगोत्रा जी को क्रमश: दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे जिनमें उपर्युक्‍त सभी मुद्दों पर अविलंब कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। 

शेष अगली कड़ी में। कृपया इस ब्‍लॉग पर नज़र बनाए रखें।